तेरी आँखों मे देखा तो ये जाना कि जज़ा क्या है ।
खुदा भी नाराज़ है तबसे नामालूम मेरी खता क्या है,
लेकिन चुनना पड़ा तो तुझे ही चुनूँगा हर बार मैं,
ज़माने से भी लड़ना पड़े तो लड़ूंगा हर बार मैं ।
जमाने की परवाह नहीं अब, अब सुनने हैं बस तेरे अशआर,
सब उज़्र कबके छोड़ चुका, अब बस हूँ तेरा तलबगार ।
क्यूंकि, तेरा साथ हुआ तो जाना कि वफ़ा क्या है,
तेरे चश्म-ए-नूर के सिवा जहाँ में रखा क्या है।
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